11 Aug 2025 • 1 min read

Agent47
Author
भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, जब घना अंधकार चहुँ ओर व्याप्त होता है, तब एक दिव्य प्रकाश का अवतरण होता है। यह वह पवित्र रात्रि है जब ब्रह्मांड आनंद से झूम उठता है, क्योंकि इस रात को देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में स्वयं भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में जन्म लिया था। जन्माष्टमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक उत्सव है - प्रेम, धर्म, और आनंद का उत्सव। यह उस नटखट बालक की लीलाओं को याद करने का दिन है, जिसकी एक मुस्कान से गोपियों का हृदय खिल उठता था और जिसकी बांसुरी की धुन सुनकर संपूर्ण प्रकृति मंत्रमुग्ध हो जाती थी।
जन्माष्टमी की कहानी हमें द्वापर युग में ले जाती है, जब मथुरा के राजा कंस के अत्याचारों से धरती काँप रही थी। कंस को एक आकाशवाणी द्वारा यह ज्ञात हुआ कि उसकी अपनी बहन देवकी की आठवीं संतान ही उसकी मृत्यु का कारण बनेगी। इस भय से उसने देवकी और उनके पति वासुदेव को कारागार में डाल दिया। कंस ने देवकी की सात संतानों को मार डाला, लेकिन जब आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण ने जन्म लिया, तो चमत्कार हुआ। कारागार के ताले स्वतः खुल गए, सैनिक गहरी निद्रा में सो गए और वासुदेव घनघोर वर्षा और उफनती यमुना को पार कर कृष्ण को गोकुल में नंद बाबा और यशोदा मैया के पास सुरक्षित छोड़ आए।
कृष्ण का अवतार केवल कंस का वध करने के लिए नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य पृथ्वी पर धर्म की पुनः स्थापना करना, प्रेम का संदेश देना और भगवद्गीता के माध्यम से मानवता को कर्म और ज्ञान का मार्ग दिखाना था। वे एक आदर्श मित्र, एक दिव्य प्रेमी, एक कुशल रणनीतिकार और एक परम गुरु थे।
जन्माष्टमी का उत्सव पूरे भारत में और विश्व भर में बसे हिंदुओं द्वारा बड़े ही धूमधाम और भक्तिभाव से मनाया जाता है। इस दिन की रौनक देखते ही बनती है।
श्रीकृष्ण का जीवन हमें कई गहरे और शाश्वत संदेश देता है जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
जन्माष्टमी केवल एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि हमारे भीतर कृष्ण चेतना को जगाने का एक अवसर है। यह हमें याद दिलाता है कि जब-जब दुनिया में अंधकार बढ़ता है, तब-तब आशा की एक किरण अवश्य जन्म लेती है। आइए, इस जन्माष्टमी पर हम न केवल बाहरी उत्सवों में शामिल हों, बल्कि अपने मन के मंदिर में भी प्रेम, ज्ञान और आनंद के दीपक जलाएं। कृष्ण की बांसुरी की मधुर धुन को अपने भीतर सुनें और उनके दिखाए गए धर्म और प्रेम के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।
आप सभी को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Know about the significance, benefits, and rituals of Nirjala Ekadashi and Budhwa Mangal on June 18, 2024. Discover how to observe this auspicious day dedicated to Lord Vishnu and Lord Hanuman. Book online pandit for Ekadashi puja.

Discover the Dhanteras 2025 date, puja muhurat, rituals, and significance. Learn what to buy for good luck and how to book a verified pandit for an authentic Dhanteras puja at home with pujaPurohit.

हिंदू पौराणिक कथाओं में समुद्र मंथन का क्या महत्व है, और श्रावण के महीने में भगवान शिव ने ब्रह्मांड को कैसे बचाया?
गणेश चतुर्थी का त्योहार 19 सितंबर से 28 सितंबर, 2023 तक मनाया जाएगा। भक्तों को भक्ति के साथ अनुष्ठान करना चाहिए और मूर्ति स्थापना और विसर्जन के लिए विशिष्ट समय का पालन करना चाहिए।

सावन 2024 के शुभ अवसर पर पूजा विधि और व्रत की जानकारी। पूजा पुरोहित के साथ ऑनलाइन पंडित बुक करें।
Your spiritual need,
just a tap away.
Your spiritual need,
just a tap away.